वसंत की नवपौध पर हरी पात सी है ज़िन्दगी।
अमावस में भी तारों से जगमग रात सी है ज़िन्दगी।

दुखों की कतरनें हैं,खुशियों की किलकारियां हैं।
दिल की अलमारी में बंद जज़्बात सी है ज़िन्दगी।

हार की मझधारों से होकर जीत के साहिल भी हैं।
हौसलों को जाँचते कठिन हालात सी है ज़िन्दगी।

चुनौतियों की धूप है,दुआओं की छाँव भी है।
इनके दरम्यां खुद से इक मुलाक़ात सी है ज़िन्दगी।

मायूसियों के बादल हैं,तो उम्मीदों की किरणें भी हैं।
इन सबको समेटे,नायाब एक सौगात सी है ज़िन्दगी।

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