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AN EPIC OF EPIC EPICNESS

I hate Once upon a time tales, And I don't go beyond the first phrase, Those stories boast of joy often, Which I used to have, Once upon a time.

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Hindi Poetry

हां! तेरे बाद भी हिस्से में चिराग आये थे, खुद मगर कत्ल किया अपना उजाला हमने।

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इस स्याह से सन्नाटे को समेटे, साहिलों मे सहमे से वो सितारे, आज भी दो अश्क़ रो लिया करते हैं.

ज़िन्दगी

वसंत की नवपौध पर हरी पात सी है ज़िन्दगी। अमावस में भी तारों से जगमग रात सी है ज़िन्दगी। दुखों की कतरनें हैं,खुशियों की किलकारियां हैं। दिल की अलमारी में बंद जज़्बात सी है ज़िन्दगी। हार की मझधारों से होकर... Continue Reading →

वो रास्ता ही था

मंज़िलों की मदहोशी में ये खबर ना हुई, वो रास्ता ही था जो मुक़ाम सा था, आज फिर इक शिकन ने परेशान सा किया, ना देख पाए वो, जो सर झुका सा था. उस ख़त को जलाने की रुत सी... Continue Reading →

क्यूँ आजकल थोड़ी नाराज़ सी हो?

  रात के धुन्धलके में खामोश एक आवाज़ सी हो, क्यूँ आजकल थोड़ी नाराज़ सी हो? बेबस से मेरे लफ़्ज़ों पे साज़ सी हो, पिघलते से मोम पर रोशनी का आगाज़ सी हो. क्यूँ आजकल थोड़ी नाराज़ सी हो? बयाँ... Continue Reading →

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